FeedCluster.com - Free Community Aggregators, Blog Aggregator Hosting Create Aggregator | Submit Blog | Log In
महिलाओं द्वारा लिखे जा रहे चिट्ठों को समर्पित पहला हिन्दी चिट्ठा संकलक
रूहों को जिस्म रोज कहाँ मिलते हैं.........
तुम्हारी सदायें [पूरी प्रविष्ठि पढें]
5 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 8
उम्र , जिम्मेदारियां , रिश्तों का विस्तार , अबूझ व्यवहारिकताएँ और शंकाएं .... खुद को तलाशना और खुद को पाना , एक दूरी रह ही जाती है ! तलाश खत्म नहीं होती , और जो मिलता है , उसके प्रतिशत में हम उलझ जाते हैं और सब मिला हुआ प्रश्न बन जाता ह ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
6 टिप्पणियां
उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है ?
"उसे तोड़ खुश होता क्यूँ है" [पूरी प्रविष्ठि पढें]
4 टिप्पणियां
क्योंकि मोहब्बत चूडियों की सलामती की मोहताज़ नही होती ...........
चूडियाँ सलामत रहें  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
22 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 7
डर एक नकारात्मक भावना है , जो बचपन के उस खेल से अक्सर पनपता है जो अनजाने में अभिभावक दे जाते हैं ... 'ये नहीं करोगे तो बुढ़ा बाबा अपनी झोली में ले जायेगा ...''खाना नहीं खाओगे तो चुड़ैल खा जाएगी ... वो लम्बे बालों वाली , बड़े बड़े दांतों ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
26 टिप्पणियां
मुस्कुरा कर मिलो जिंदगी...
परसों एक एचआर का फोन आया एक जॉब ओपनिंग के बारे में...मैं आजकल फुल टाइम जॉब करने के मूड में थी नहीं तो अधिकतर सॉरी बोल कर फोन रख दिया करती थी. इस बार पता नहीं...शायद हिंदी का कोई शब्द था या दिल्ली के नंबर से फोन आया था या कि जिस ऑफिस में ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
8 टिप्पणियां
ना, प्लीज़, लिजलिजी भावुकता तो रहने ही दो!.............................घुघूती बासूती
जब हम स्त्रियों, बच्चियों, बेटियों, लड़कियों की बात करते हैं तो वैसे नहीं करते जैसे किसी सामान्य मानव की करते हैं जिसके अधिकार हैं, दुख हैं, सुख हैं, इच्छाएँ हैं, आकांक्षाएँ हैं, जो सही भी हैं, गलत भी, बुरी भी, भली भी। हम उन्हें या तो स ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
31 टिप्पणियां
नींद ,सपने और ख्वाब
नींद भी अजब होती है ..ज़िन्दगी और सपनो सी यह भी आँख मिचोली खेलती रहती है ..इसी नींद के कुछ रंग यूँ उतरे हैं इस कलम से ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
22 टिप्पणियां
कृष्ण लीला ………भाग 48
इधर कन्हैया कालिय के मस्तक पर विराजते जल के ऊपर आते थे उधर बलभद्र जी मैया को समझाते थे धैर्य धारण करो मैया प्राणप्यारे अभी आते हैं मगर ब्रजवासी ठौर नही पाते हैं रुदन किये जाते हैं मैया खुद को कोसती है मेरा लाला डूबे और मै जीती ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
9 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 6
( माँ ) सृष्टि तुम प्रकृति तुम सौन्दर्य तुम परिवर्तन तुम तुम ही हो विद्या तुम्हीं हो लक्ष्मी और साहसी दुर्गा तुम तुम हो सपना तुम्हीं हकीकत जीवन का हर स्रोत हो तुम ... शिव की जटा से निकली गंगा आदिशक्ति हो तुम तुम्हीं साज हो तुम् ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
24 टिप्पणियां
राग पहाड़ी !
बंजारों सा ये मन उड़ते उड़ते जाने कौन शहर किस गली पहुँच जाता है हर रोज़... उसकी परवाज़ पर न तो कोई पहरा है न ही कोई सरहद उसे रोक पायी है कभी... बिना किसी रोक टोक कहीं भी, कभी भी चला जाता है... देखा जाए तो ये मन वो मुसाफ़िर है जिसे क ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
3 टिप्पणियां
निब तोड़ देनी है आज...
क्यूँ लिखा जाए कि एक एक शब्द बायस होता है एक बनते हुए ज़ख्म का...शब्दबीज होते हैं...खून में घुल जाने के लिए...आंसुओं में चुभ जाने के लिए...हर शब्द एक बड़े से ज़ख्म के पेड़ का नन्हा सा बीज होता है. हर शब्द जो मैं लिखती हूँ हर शब्द जो तुम ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
5 टिप्पणियां
.जैसे बीच यात्रा में छूटा हुआ मौन ,जैसे किसी निगूढ राह से मानों बीती हुई एक शाम ,बीत गई माँ ...हर दिन मुझमें शेष रह जाती हो ''माँ''
इंद्र धनुष के जितने रंग माँ के उतने शेड्स ,जब माँ थी तो जीवन में जल की तरह घुली हुई थी ...तब कोई जलन ना थी,वर्षों पीछे छूटे हुए समय को देखती हूँ तो इस समय से कुट्टी कर लेने को जी चाहता है --जहाँ तक पंख ले जाएँ बचपन से तब तक, जब तक माँ स ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
4 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 5
( कवि मात्र खुद को कैनवस पर नहीं उतारता , बल्कि समग्रता में जीता है ..... चिड़िया की आँखों की भाषा लिखने से वह चिड़िया नहीं हो जाता , बल्कि वह एक संवेदनशीलता का उदाहरण है ... सिक्के के दूसरे पहलू को उजागर करने की चेष्टा ! ) [पूरी प्रविष्ठि पढें]
26 टिप्पणियां
एक आसमाँ मेरा भी है
एक आसमाँ मेरा भी है जिसका नीला रंग  मेरे अंतस पर जब छाता है आगत विगत के सारे  बंद द्वार खोल जाता है मैं .........हाँ मैं ......आखिर कौन हूँ कहाँ से आया हूँ कहाँ है जाना  किस किस युग में  कौन सा अवतार लिया कौन सा लक्ष्य भेदन कि ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
23 टिप्पणियां
दर्द
दर्द अब पत्थर हो गया है आँखें वीरान पथरीली जमीन [पूरी प्रविष्ठि पढें]
15 टिप्पणियां
क्या लिखूं तेरे लिये---- ओ मां
                       सच ही तो है मां के बारे में लिखना मुश्किल ही नहीं बहुत ही नामुमकिन है। नामुमकिन इसलिये क्योंकि वो मां जिसने हमें जन्म दिया उसके बारे में लिखने के लिये शब्दकोश में भी शायद शब्द पूरे न मिलें।           मां संस्कारो ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
17 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 4
मैं ख्यालों की एक बूंद सूरज की बाहों में कैद आकाश तक जाती हूँ बादलों के सीने में छुपकर धरती की रगों तक बहती हूँ कभी फूल, कभी वृक्ष में सौन्दर्य कभी गेहूं - कभी धान में समाकर गरीबों की थाली में सुकून बन ईश्वर का मंत्र बन जाती हू ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
32 टिप्पणियां
मातृत्व का अहसास
आज मदर्स डे है. कहते हैं भगवान ने अपनी कमी पूरी करने के लिए इस धरा पर माँ को भेजा. मेरी माँ ने मेरे लिए बहुत कुछ किया. आज भी जब कभी उलझन में होती हूँ तो माँ से बात करके जो आश्वस्ति मिलती है, वह कहीं नहीं. माँ का रिश्ता दुनिया का सबस ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
7 टिप्पणियां
मेरी ममा सबसे प्यारी
आपको पता है आज मदर्स डे है. हर साल मई माह के दूसरे रविवार को यह सेलिब्रेट किया जाता है. मैं तो अपनी ममा से बहुत प्यार करती हूँ.मुझे पता है कई बार मैं उन्हें बहुत परेशान करती हूँ पर ममा कभी बुरा नहीं मानती. मुझे ढेर सारा प्यार-दुलार देती ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
6 टिप्पणियां
मेरी मां....
हमारे देश में मातृ-दिवस मनाये जाने की सार्थकता मुझे समझ में नहीं आती, क्योंकि यहां तो हर दिन मातृ-दिवस सा है...फिर भी अब जब हम इसे मनाते ही हैं, तो इसी बहाने उन्हें प्रणाम....... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
62 टिप्पणियां
फिर मैं कैसे अव्यक्त को व्यक्त कर सकती हूँ......
क्या बहती हवा बंध सकती है  क्या खुशबू मुट्ठी मे कैद हो सकती है  क्या धड़कन बिना दिल धड़क सकता है  नहीं ना ...........तो फिर कहो तुम्हें कैसे शब्दों में बांधू .....माँ माँ ...........सिर्फ अहसास नहीं तो कैसे शब्दों में बंधे शब्दों ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
22 टिप्पणियां
चश्में
चश्में  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
28 टिप्पणियां
इति हैप्पी मदर्स डे !
कही किसी छोटे से घर में  नन्हे हाथों से बनाये  कार्ड  बगिया से तोड़ लिया गया एक फूल  गुल्लक के पैसों से खरीदी चॉकलेट  या माँ के बालों के लिए क्लचर गले में बाहें डाल कर  गालों से गाल सटाकर  गीली छाती से गर्वोंन्मत  नन्हे मुन्नों ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
32 टिप्पणियां
अकेलेपन को एन्जॉय करना इज लाइक डेवलपिंग अ टेस्ट फॉर गुड स्कॉच...इट कम्स विद टाइम.
स्कॉच के सुनहले गिलास के पीछे मोमबत्ती जल रही थी...लाईट कटी हुयी थी और गहरे अंधकार में सिर्फ उतनी सी रौशनी थी...वो भी पूरी की पूरी स्कॉच में घुल रही थी...बहुत से आइस क्यूब थे. आसमान में घने बादल छाये थे और कहीं से एक सितारे भर की रौशनी ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
8 टिप्पणियां
हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा बना शमशेर का स्‍थायी घर
हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा बना शमशेर का स्‍थायी घर [पूरी प्रविष्ठि पढें]
वक्त पल-भर थमा , फिर …
आस-पास एक मीठी दोपहर की करवट में बिना आहट किसी का करीब से गुज़रना , ध्यान बांटता है … कोई…विदेह , अजन्मा , अविरल , अनंत , जो मेरे सन्निकट था अभी और ठीक उसी पल दूरदराज़ किसी वन में कुलांचे भरते एक सुन्दर चीतल के पास से भी गुज़रा किया . जिस ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
5 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 3
ज़िन्दगी अगर रहस्य है तो रहस्यों की खुलती परतें भी है , अगर अनुत्तरित है तो कई जादुई जवाब भी हैं , कुरूप है तो सौन्दर्य की अदभुत मिसाल भी ... रक्तरंजित चेहरों में जागृति के गीत भी हैं ... हार में भी जीत की ख़ुशी , पाने में भी खोने सा एह ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
26 टिप्पणियां
शाहजांह वर्सिस मायावती
बहुत पहले साहिर ने लिखा ...एक बादशाह ने बना के हसीं ताजमहल.. दुनिया को मुहब्बत की निशानी दी है...||  और यह ताजमहल वाकई  दुनिया में प्रेम का प्रतीक  बन  गया है आगरा कई बार जाना हुआ है और हर बार ताजमहल  के साथ साथ आगरा शहर को भी देखा है ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
16 टिप्पणियां
खुद की तलाश - 2
बचपन से युवा युवा से बालों पर उतरती सफेदी के मध्य हम जाने कितने रिश्ते जीते हैं . कुछ रिश्ते तो हर पल में शामिल हो जाते हैं .... पर अचानक [पूरी प्रविष्ठि पढें]
28 टिप्पणियां
मोहब्बत का फूल .......
पिछले दिनों जो इमरोज़ जी पर पोस्ट लिखी , वह यहाँ के दैनिक समाचार पत्र में भी छपी   ...मैंने  उसकी कटिंग इमरोज़ जी को  भेजी थी  .....जवाब में उन्होंने तुरंत  ५,६ पृष्ठों की  एक  लम्बी  नज़्म लिखकर भेजी ...नज़्म क्या थी हीर के लिए मोहब्ब ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
42 टिप्पणियां
छुपा रहता है माँ का संघर्ष !
माँ ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार के लिए दिन-रात एक कर अपना सर्वस्व निछावर कर पूर्ण समर्पित भाव से अपने घर परिवार, बच्चों को समाज में एक पहचान देकर स्वयं की पहचान घर चारदीवारी में छुपा कर रखती है। निरंतर संघर्ष कर उफ तक नहीं करती, ऐ ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
51 टिप्पणियां
फुटकर चिप्पियाँ
लोगों के रिकवर करने के अलग अलग तरीके होते हैं...मैं इस मामले में बहुत कमज़ोर हूँ...आई डोंट नो हाउ टू मूव ऑन...मैं अक्सर वहीं अटक जाती हूँ जहाँ से मुझे आगे बढ़ जाना चाहिए. किसी मोड़ पर बहुत दिन ठहर जाओ तो वहां घर बनाने का मन करने लगता है ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
11 टिप्पणियां
खुद की तलाश
खुद की तलाश हर किसी को होती है .... बचपन में हम झांकते हैं कुँए में , जोर से बोलते हैं .... पानी में झांकता चेहरा , बोली की प्रतिध्वनि पर मुस्कुराना खुद को पाने जैसा प्रयास और सुकून है .... खुद को ढूंढना ' मैं ' के बंधन से मुक्त होता है ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
33 टिप्पणियां
कहाँ से चले .....कहाँ आ गए...
सुहाना सा मौसम गुलाबी स्वेटर और तुम्हारी खूशबू!!  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
10 टिप्पणियां
तो फिर तुम्हे कैसे निर्वस्त्र कर दूँ।
  पता है कभी कभी क्या होता है जब भी तुम्हे तुम्हारे ख्याल तुम्हारी बातें कविता मे उतरती हैं यूँ लगता है जैसे मेरी चोरी किसी ने पकड ली हो तुम जो सिर्फ़ मेरे हो मेरी अमानत मेरी मोहब्बत की इंतहा जिसे सिर्फ़ मै ही पढ सकती हूँ ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
32 टिप्पणियां
धोखा सगा दिया
"धोखा सगा दिया" [पूरी प्रविष्ठि पढें]
9 टिप्पणियां
कल्पना का संसार
कल्पना का संसार सपनो से अधिक बड़ा होता है ,सपने जो हमे आते हैं वो असल में कही ना कही हमारी कल्पना से ही जुड़े होते हैं !जब हम बच्चे होते हैं तो तब हमारा मस्तिष्क एक कोरे काग़ज़ की तरह होता है धीरे धीरे जैसे जैसे हमारा मस् ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
14 टिप्पणियां
जंगल में हुआ क्रिकेट और चाँद पर बरसा पानी
(आपने कई बार मेरे ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' में ममा-पापा की बाल-रचनाएँ पढ़ी होंगीं. अब तो इन सबको मिलकर ममा-पापा का बाल-गीत संग्रह भी आ गया है. ममा का बाल-गीत संग्रह है- 'चाँद पर पानी' और पापा का है- 'जंगल में क्रिकेट'. पिछले दिनों इनका दिल ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
5 टिप्पणियां
बह जाने को कितना पानी...जल जाने को कितनी आग?
एक लेखक की सबसे बड़ी त्रासदी है कि उसके लिखे हर शब्द को उसके जीवन का आइना मान लिया जाता है...उसके ऊपर सच को चित्रित करने की इतनी बड़ी जिम्मेदारी डाल दी जाती है कि बिना भोगा हुआ सच वो लिखने में कतराता है...इसी बात पर एक लेखक की ही डायरी ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
12 टिप्पणियां
कृष्ण लीला ……भाग 47
ब्रह्मा के पुत्र कश्यप की कद्रु विनता नाम की दो रानियाँ थीं कद्रु के कालीनाग सर्प और विनता के गरुड और सूर्य के सारथि अरुण नामक दो पुत्र हुये दोनो सवति मे एक दिन ये बात हुई सूर्य के रथ मे किस रंग के है घोडे जुते विनता ने श्वेतवर ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
12 टिप्पणियां
क्रम जारी है ...
'तब तो बना दे तू भोले को हाथी ....' खेल से परे एक काल्पनिक काबुलीवाला हींग टिंग झट बोल में बस गया ... जब कोई नहीं होता था पास अपनी नन्हीं सी पोटली खोलती काबुलीवाले को मंतर पढके बाहर निकालती और पिस्ता बादाम मेरी झोली में सच्ची मेर ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
35 टिप्पणियां
देखो रूठा ना करो ...
ओह तो ये तुम हो,,,, उसने अपनी उनींदी आँखे खोलते हुए कहा , तो रात के ढाई बजे अपने बेडरूम में तुम किसे एक्स्पेक्ट कर रही थी उसकी  की आवाज़ में झुंझलाहट थी ,  "सलमान खान को ... उसने  मुस्कुराते हुए जवाब दिया. जिनके पति रात देर से आते है ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
36 टिप्पणियां
हरिभूमि में ‘ज़िन्दगी एक खामोश सफ़र’
जहाँ ना पहुंचे रवि वहाँ पहुंचे पाबला जी .......अगर ये कहूं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं .....देखिये हमें खबर भी नहीं और पाबला जी ने घर बैठे बता दिया ........दिल से शुक्रगुजार हूँ उनकी .......और मै ही क्या हर वो ब्लोगर होगा जिसे भी वो घर बैठे ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
19 टिप्पणियां
जानती हूँ........
अब तक मुझसे मेरा सब लेते रहे हो मेरे हिस्से की धूप ले ली तुमने मेरे हिस्से की छांह भी मांग ली भटकती रही मैं ,और तुमने पनाह भी मांग ली.... अब मेरी बारी आई है जो लिया है तुमने जानती हूँ लौटा नहीं पाओगे एक मन ही बचा था तुम्हारे प ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
5 टिप्पणियां
पूर्व राज्यपाल डा. भीष्म नारायण सिंह ने किया कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव के बाल-गीत संग्रहों का विमोचन
"शेर चंद ने उठाया बल्ला, चीता फिर से गली में दुबका. हाथी ने दस्ताने बांधे, चिड़िया लगी है गेंद चमकाने. जंगल में यदि क्रिकेट खेला जाए तो कुछ ऐसा ही होगा . है ना ? और सोचिये चाँद पर यदि बरसेगा पानी तो कैसे कहेंगे दादा-दादी कहानी ? इन बातो ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
4 टिप्पणियां
गर उनकी आंखों में......
“अब की बारिश में, ये ख्वाब भीग जाएंगे, गर उनकी आखों में कहीं, हम नजर आएंगे।“      [पूरी प्रविष्ठि पढें]
2 टिप्पणियां
ठहराव ......
उम्र के   छठे  दशक  का  प्रथम  पड़ाव - सोच पर भी  आ जाता है  जैसे एक ठहराव , अनुभवों की पोटली  संग बंधी रहती है  फिर भी कभी कभी  अनुभवों की  बहुत कमी लगती है  लगता है कि जैसे सब कुछ  बिखर रहा है  समेटने के लिए  अंजुरी का ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
68 टिप्पणियां
हाँ ........मैंने भी इक पाप किया है
आज भी दुखता होगा  अंतस आज भी बंधाती होगी खुद को वो ढांढस  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
22 टिप्पणियां
Urdu shayari Salaam-e-Mehfil April 30 '12 Part - 1 - seema gupta.avi
Second episode of Salaam-e-Mehfil April 30 '12 Part - 1 telecasted on 30/april/2012  Please watch on the given link [पूरी प्रविष्ठि पढें]
1 टिप्पणी
चिल्लर ख्याल...सुबह सुबह ढनमनाते हुए
आजकल मेरा दिमाग जाने कहाँ रहता है...कल ऊँगली काट ली सब्जी कट करते हुए...सोच कुछ रही थी...नया चाकू था एकदम नीट कट लगा...गहरा...खून बहुत तेज़ी से बह रहा था...मुझे खून सम्मोहित करता है...टहकता...दर्द में डुबोता...तो देख रही थी तब तक कुणाल ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
एइ मेघला, दिने ऐकला, घोरे थाके ना तो मोन
सुनो, जान...उदास न हो...कुछ भी ठहरता नहीं है...है न? कुछ दिन की बात है...मुझे मालूम है तुम्हें किसी और से प्यार हो जाएगा...कुछ दिन की तकलीफ है...अरे जाने दो न...लॉन्ग डिस्टंस निभाने वाले हम दोनों में से कोई नहीं हैं...तब तक कुछ अच्छी फि ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
5 टिप्पणियां
इस वचन को मिथ्या करो..................
हे कृष्ण बनो फिर सारथि [पूरी प्रविष्ठि पढें]
10 टिप्पणियां
चुप न रहती तो क्या करती !
चुप न रहती तो क्या करती बोलती तो भारतीय नारी के पद से जाती ! ... तो चुप्प रही आँखें प्रभु की बनायीं सीमा से अधिक फ़ैल गईं ! दिमाग में टकराते पत्थरों से जो आग निकली उससे चिंतन का चूल्हा जलाया जो खिचड़ी खुद चढ़ गई थी उसमें आश्चर् ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
46 टिप्पणियां
मसीहा
मसीहा [पूरी प्रविष्ठि पढें]
32 टिप्पणियां
कुर्ती -कांचली (राजस्थानी संस्कृति में परिधान-4)
राजस्थान के घाघरा /लहंगा ओढ़नी के बारे में कौन नहीं जानता . प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर में वधू के लिए चुने  जाने वाले परिधान में लहंगा ओढ़नी ही सर्वाधिक लोकप्रिय है . अन्य प्रदेशों के मुकाबले में  राजस्थान में महिलाओं के लिए मुख्य परिध ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
24 टिप्पणियां
तुम मेरा दर्द हो कि मॉरफीन?
ये मेरे तुम्हारे बीच चुप की नदी कब बहने लगी पता नहीं...फिर सोचती हूँ...कि पुल तो मैंने बनाया था अपनी ओर से, तुम्हारी ओर से तो हमेशा ख़ामोशी थी...जब तक मैं बातें करती, हँसती...खिलखिलाती...नदी पर एक पुल बन आता जिसपर हम दोनों कुछ देर खड़े ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
16 टिप्पणियां
रिश्ते निभाना सीखते...
कंचन भाभी का फोन आया वो रो रही थी। मम्मी पापा के क्वाटर खाली करने का दुख उन्हें इतना हुआ कि दिल्ली में आए हुए मेरे इन सात साल में पहली बार उन्होंने मुझे फोन किया। पीछे से मीशा रुआसी आवाज़ में बोले जा रही थी मम्मी बस अब मत रो... फिर उसने ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
1 टिप्पणी
जिम्मेदार कौन ?
जिम्मेदार कौन ? [पूरी प्रविष्ठि पढें]
19 टिप्पणियां
सबकुछ प्रयोजनयुक्त !
सत्य क्या है ? वह - जो हम सोचते हैं वह - जो हम चाहते हैं या वह - जो हम करते हैं ? बिना लिबास का सत्य क्या बर्दाश्त हो सकता है ? सत्य झूठ के कपड़ों से न ढंका हो तो उससे बढ़कर कुरूप कुछ नहीं ! आवरण हटते न संस्कार न आध्यात्म न मो ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
39 टिप्पणियां
जवान जानेमन, हसीन दिलरुबा...
ई बैटमैन की हेयरस्टाइल है...कैसी है?कल बहुत दिन बाद मैंने शोर्ट बाल कटाये...१०थ तक मेरे बाल हमेशा छोटे रहे थे पर उसके बाद लंबे बालों का शौक़ था तो कभी छोटे करवाए नहीं...पर होता है न, मन एकरसता से ऊब जाता है, उसमें मैं तो और किसी चीज़ पर ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
19 टिप्पणियां
आज तो लग रहा है सबके कहो या अपने ऊपर ये ही फ़िट बैठेगा ………
आज तो लग रहा है सबके कहो या अपने ऊपर ये ही फ़िट बैठेगा ……… ना किसी की आँख का नूर हूँ ना किसी के दिल का सुरूर हूँ …… ऊँ ऊँ ऊँ  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
24 टिप्पणियां
अधूरी
कुछ अधपढ़ी किताबें ,कुछ अधूरे लिखे ख़त , कुछ बाकी बचे कामों की लिस्ट के साथ आँख बंद करके लेटी मैं ....सोच रही हूँ आज किसी अधूरे सपने को पूरा कर लूं ..पर ये अधूरापन मुझे कभी पूरा होने नहीं देगा ,याद नहीं आता कभी कोई काम अंजाम तक पहुँचा ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
19 टिप्पणियां
जे थूरे सो थॉर...बूझे?
ऊ नम्बरी बदमास है...लेकिन का कहें कि लईका हमको तो चाँद ही लागे है...उसका बदमासी भी चाँदवे जैसा घटता बढ़ता रहता है न...सो. कईहो तो ऐसा जरलाहा बात कहेगा कि आग लग जाएगा और हम हियां से धमकी देंगे कि बेट्टा कोई दिन न तुमको हम किरासन तेल डाल ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
13 टिप्पणियां
सफ़र
जिंदगी का सफ़र आसान है मगर, मुश्किलों की भी कोई कमी तो नहीं। [पूरी प्रविष्ठि पढें]
29 टिप्पणियां
'जादू' की कहानियां।।
इन दिनों जादू को सुलाते वक्‍त रोज़ लोरियां गानी पड़ती हैं। इसी बहाने बहुत सारी पुरानी-पुरानी लोरियां मुखस्‍थ भी हो गयी हैं। लोरियों में से जादू की सबसे पसंदीदा लोरी है--'चंदा मामा दूर के, पुए पकावें बूर के'। एक दिन इसे गाने के बाद मैंने ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
उषा का आह्वान करो
मेरे शब्द रुंआसे हैं या क्लांत भयभीत अपनी जिजीविषा से ही निराश हो चले हैं या फिर वक़्त की सुनामियों में उनका नामोनिशां नहीं रहा ... नाव तो डाल दी मैंने भावनाओं के सागर में लहरों से जूझते जूझते जाना मैंने तैरना सीखा ही नहीं और खु ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
37 टिप्पणियां
सोचो...हम और तुम परपेंडिकुलर रेखाएं ही थे न?
कोम्पोजिशन...सबसे पहली चीज़ पढ़ाई जाती है फोटोग्राफी में. मुझे जिंदगी के बारे में भी पढ़ाना होता तो फोटोग्राफी के कम्पोजीशन से ही पॉइंटर्स उठाती. रूल ऑफ थर्ड्स कहता है कि कुछ भी एकदम बीच में मत रखो...इससे उसकी खूबसूरती घट जाती है...आँखो ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
6 टिप्पणियां
अभी तो तुमने सिर्फ शुक्ल पक्ष देखा है
अभी तो तुमने सिर्फ शुक्ल पक्ष देखा है उजाला पाक कहते है ना जिसमे सब हरा ही हरा नज़र आता है महबूब का हर रंग खूब नज़र आता है मगर अभी तुमने कृष्ण पक्ष तो देखा ही नहीं जिसमे अमावस भी आती है और चन्द्रमा की चाँदनी पर श्राप सी पड़ ज ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
31 टिप्पणियां
गर्मियों की छुट्टियां और मायके बनते घर
गर्मियों की छुट्टियां और मायके बनते घर - पोस्‍ट को पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर जाएं - www.sahityakar.com [पूरी प्रविष्ठि पढें]
3 टिप्पणियां
आईसीयू में पड़ी भारतीय भाषाएँ
आईसीयू में पड़ी भारतीय भाषाएँ [पूरी प्रविष्ठि पढें]
गुरुदत्त- चिट्ठियों के झरोखे से
गुरुदत्त की चिट्ठियों की किताब...Yours Guru Dutt, Intimate letters of a great Indian film maker by Nasreen Munni Kabir...से उनकी एक चिट्ठी का कच्चा-पक्का अनुवाद कर रही हूँ. मैंने कभी भी अनुवाद नहीं किया है इसलिए सुधार की गुंजाईश होगी.  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
6 टिप्पणियां
मत समझिये कि मैं औरत हूँ, नशा है मुझमें....
मत समझिये कि मैं औरत हूँ, नशा है मुझमें माँ भी हूँ, बहन भी, बेटी भी, दुआ है मुझमे [पूरी प्रविष्ठि पढें]
3 टिप्पणियां
मृत्युतीत
लड़की ने एजल पर कैनवास फिक्स किया है...ठीक उसके सामने खड़ी होकर ब्लेड से एक धमनी काटी है...जैसे पिचकारी से गहरा लाल रंग छूटा हो...कैनवास पर अर्ध वृत्ताकार गोला बन गया है...खून पेंट से गाढ़ा होता है, खून में दर्द की मिलावट हो तो और भी. ह ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
तुम आ गये मोहन
तुम आ गये मोहन  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
13 टिप्पणियां
मेरा वो समान लौटा दो ....
 चलते चलते मेरा साया कभी कभी यूँ करता है जमीन से उठ के ,सामने आ कर हाथ पकड़ कर कहता है अब की बार मैं आगे चलता हूँ और तू मेरा पीछा करके देख जरा क्या होता है ?" और ........... एक दफा वो याद है तुमको , बिन बत्ती जब साईकल का चालान हु ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
12 टिप्पणियां
इंसान ओढ़े है नकाब
आज चारों ओर देखने को मिलते हैं नकाब ओढ़े इंसान | [पूरी प्रविष्ठि पढें]
16 टिप्पणियां
साहित्य का बलात्कार आखिर हो ही गया
भार उभारों का ना महसूस हुआ होगा सिर्फ भार हीन उभार ही दिखे होंगे  यही तो तुमने कहना चाहा है शब्दों से खेलना चाहा है सिर्फ हिम्मत नहीं कर पाए हो सच कहने की इसलिए  उभारों का सहारा लिया  और अपने मन की ग्रंथि को  उभारों तले दबा कर उ ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
18 टिप्पणियां
मेरा आकाश ..मेरी आकांक्षा...
ये जो बादलों के टुकड़े हैं,उन्हें पकड़ना है न जाने कितनी दूर से समेटना है कुछ इतने भारी कि जगह से न डिगते कुछ इतने हलके कि जगह पर न टिकते रह रह कर जब वो उनको निरखती सोचती,रूकती, फ़िर दौड पड़ती तभी उसकी अपनी कुछ बूँदें बरसती जब कभी वो ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
16 टिप्पणियां
प्रभु को आगाह किया है
शून्य में कौन मुझसे कह रहा क्या कह रहा ... कुछ सुनाई नहीं देता ! सन्नाटों की अभेद दीवारें पारदर्शी तो है इक साया सा दिखता भी है कभी कुछ कहता कभी चीखता सा ... पर क्या कह रहा है कैसे जानूं ! सुनने से पहले देखना चाहती हूँ साया है ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
31 टिप्पणियां
वह खुश हो लेता है!
छोटू की कोई अपनी बपौती नहीं, वह हक़ से कूड़े के ढ़ेर पर भी अपना अधिकार नहीं जता पाता. जब कभी उसने ऐसी हिमाकत करने की कोशिश की तो मोहल्ले भर के भुक्कड़ कुत्तों ने उसे खदेड़ने की एकजुट होकर पुरजोर कोशिश कर डाली। लेकिन हर बार हर किसी की चल ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
53 टिप्पणियां
सागर मंथन
कटूक्तियाँ , मन के भँवर में घूमती रहती हैं  गोल गोल  संवेदनाएं  तोड़ देती हैं दम अपने अस्तित्व को  उसमें घोल , [पूरी प्रविष्ठि पढें]
71 टिप्पणियां
कृष्ण लीला .........भाग 46
कालिय के सौ सिर थे जिसे भी ना वो झुकाता था उसी को प्रभु अपने पैरों से कुचलते थे उसके मुख और सिर से खून निकलता था जो कान्हा के चरणों पर लहू की बूंदें पडती थीं ऐसा लगता मानो रक्त पुष्पों से पूजा की जा रही हो प्रभु के इस अद्भुत त ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
11 टिप्पणियां
रिश्ते
रिश्ते रोड पर लगे नियोन साइन से कभी जलते कभी बुझते कभी रंग बदलते पर हमेशा लुभाते फरिश्ते से रिश्ते दर्द में रिसते पल पल को तरसते मिल के भी नही मिलते जाने कैसे हैं इस के रस्ते. [पूरी प्रविष्ठि पढें]
7 टिप्पणियां
खिड़की
खिड़की [पूरी प्रविष्ठि पढें]
40 टिप्पणियां
आओ ....... सिलवटो को बुहारें
आओ  सिलवटो को बुहारें यादों की झाड़ू से शायद अक्स में वक्त नज़र आये  जो छुप गया है सर्द अँधेरे में उस अक्स की कुछ गर्द उतारें [पूरी प्रविष्ठि पढें]
32 टिप्पणियां
कोई पहचान शेष नहीं
शिकायतों का काफिला यूँ निकला कि सब अकेले हो गए श्रेष्ठता के दावे में सब औंधे गिर पड़े ... खुद में ही कोई पहचान शेष नहीं तो दूसरे की आँखों में क्या देखें सबके सब महज खड़े से हैं पाँव किसी के भी नहीं ... एक दूसरे की बैसाखियों पर हँ ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
35 टिप्पणियां
WATCH ME ON "SALAM-E-M​EHFIL" for ZEE Salam TV Channel TELECASTED ON 24TH APRIL 2012
WATCH ME ON "SALAM-E-M​EHFIL" for ZEE Salam TV Channel TELECASTED ON 24TH APRIL 2012 Salaam-e-Mehfil April 24 '12 Part - 2 Subscribe to kuchlemhe by Email [पूरी प्रविष्ठि पढें]
3 टिप्पणियां
हम अक्‍सर “यूज” होते हैं
हम अक्‍सर “यूज” होते हैं  आलेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं - www.sahityakar.com [पूरी प्रविष्ठि पढें]
4 टिप्पणियां
अपूर्वा हुई डेढ़ साल की..बधाई !!
आज मेरी बहन अपूर्वा पूरे डेढ़ साल की हो गई. पता ही नहीं चला कि समय इत्ती तेजी से कैसे बीत गया. पहले अंडमान और अब इलाहाबाद.. [पूरी प्रविष्ठि पढें]
7 टिप्पणियां
बुद्ध .........कौन ? ........एक दृष्टिकोण
बुद्ध .........कौन ? ........एक दृष्टिकोण  [पूरी प्रविष्ठि पढें]
29 टिप्पणियां
शब्दों के अरण्य में
शब्दों के अरण्य में विचारों की गोष्ठी होती है सुख दुःख आलोचना समालोचना प्यार नफरत ... भावों की अध्यक्षता में अपना अस्तित्व ढूंढते हैं किसी के हिस्से देवदार किसी के हिस्से चन्दन वृक्ष भुजंग से भरा किसी को कंटीली झाड़ियाँ ... इस ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
38 टिप्पणियां
मातृत्व की गरिमा बढ़ा देते हैं " पीले -पोमचे " ...राजस्थानी संस्कृति में परिधान (3)
प्रकृति द्वारा इस सृष्टि की सम्पूर्णता के लिए दिए गये अनुपम उपहारों में  नर और नारी भी सम्मिलित हैं .प्रकृति ने ही उसी नारी को मातृत्व का सुख ,अधिकार और गरिमा के अनूठे उपहार से नवाज़ा है ! कहा भी जाता है कि ईश्वर सब जगह उपस्थित नहीं हो ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
29 टिप्पणियां
खुशियों का खज़ाना.
आज एक शादी में अपनी एक कलीग की बेटी से मिली. नाम सुनते ही वह पहचान गयी अरे आप वही है ना जो ब्लॉग लिखती है.में आपको पढ़ती हूँ .सच कहूँ अभी कुछ समय से लेखन से खास कर ब्लॉग लेखन से एक दूरी सी बन गयी थी.वैसे लेखन जारी है .आजकल कुछ कहानियों ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
28 टिप्पणियां
लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
मैं ऐसी ही किसी शाम मर जाना चाहती हूँ...मैं दर्द में छटपटाते हुए जाना नहीं चाहती...कुछ अधूरा छोड़ कर नहीं जाना चाहती. [पूरी प्रविष्ठि पढें]
16 टिप्पणियां
रात सिसकती है अब तन्हा , दिन अश्क बहाता जाता है
रात  सिसकती है  अब तन्हा , दिन  अश्क  बहाता  जाता  है [पूरी प्रविष्ठि पढें]
25 टिप्पणियां
कृष्ण लीला ........भाग 45
टकटकी लगाये सब देख रहे हैं कब आवेंगे मनमोहन सोच रहे हैं इधर कान्हा नटवर रूप धरे कालीदह में पहुंचे हैं मोहिनी मूरत की सुन्दरता देख नागिन मोहित हो कहने लगीं हे स्वरूपवान कोमल तन  तुम यहाँ क्यों आये हो अभी तो कालियनाग सोया है जल्द ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
11 टिप्पणियां
हाए!!! क्यों ?
कमरे की खिड़की गाड़ी का हार्न और आँखों की चमक ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
9 टिप्पणियां
एरीजोना प्रांत, फीनीक्स शहर , मेरी यात्रा का प्रथम पडाव
ॐ  बहुत दिनों बाद आज पुन: ब्लॉग लिख रही हूँ .. आज , साल २०१२ , अप्रैल की २४ तारीख है और अक्षय तृतीया का पवित्र दिवस है   मेरी पिछले माह की यात्राओं के बारे में आपको अवगत करवाते हुए कुछ नई जानकारियाँ बतलाना चाहती   हूँ .  मेरी यात्रा ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
13 टिप्पणियां
ऐसी माँ ही ईश्वर होती है !
प्यार करनेवाली माँ जब नीम सी लगने लगे तो समझो - उसने तुहारी नब्ज़ पकड़ ली है और तीखी दवा बन गई है ! याद रखो - जो माँ नौ महीने तुम्हें साँसें देती है पल पल बनती काया का आधार बनी रहती है तुम्हारी नींद के लिए पलछिन जागती है वह ... [पूरी प्रविष्ठि पढें]
40 टिप्पणियां
 
Featured Feeds
"seemadani ke kalam se"
"तोषी"
"हिन्दी भारत"
' हया '
chhammakchhallo kahis
Dr. Smt. Ajit Gupta
Dr.Anita Soni-Poetess and Shayara
GULDASTE - E - SHAYARI
Hindi kavya sangrah
jai madhyapradesh
JHAROKHA
Kala Jagat
kase kahun?
KAVITARAWATBPL
Krantikari Sipahi
kuchlamhe
Kusum's Journey (कुसुम की यात्रा)
Lamhon Ke Jharokhe Se...
mehek
MERA SAGAR
PRAKAMYA
Sansmaran
अदब
अनकही बातें
अनसुनी आवाज
अपना घर
अपनी बात...
अमृता प्रीतम की याद में.....
आँख की किरकिरी
उत्सव के रंग
उनींदरा
उल्लास: मीनू खरे का ब्लॉग: मुस्लिम महिलाओं ने निकाला वन्देमातरम सम्मान मार्च
एक प्रयास
कठपुतली
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में
कुछ बातें ...
कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **
कुमाउँनी चेली
क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलती......
खट्टी-मीठी यादें
गीत मेरे ........
गीत...............
घुघूतीबासूती
ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र
ज्ञानवाणी: मत दीजिये मेडल , बधाई तो दे ही दीजिये .......
डॉ.कविता'किरण'(कवयित्री)
ताना-बाना
नारीवादी-बहस
पाखी की दुनिया
पुलिया से ब्लागिंग तक...
बतकही
बावरा मन
भगवान भरोसे
मुझे कुछ कहना है
मेरी कृति _
मेरी भावनायें...
मेरे आस-पास
मेरे मन की
यशस्वी
रचना रवीन्द्र
लहरें
लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`
वसुधा
विश्व महिला परिवार
शब्द-शिखर
शब्दो के अक्षत्
संचिका
सप्तरंगी प्रेम
सरगम
साधवी
सास बहु
हरकीरत ' हीर'
…पारूल…चाँद पुखराज का……